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शुक्रवार, 27 मई 2016

VISION IAS के करंट अफेयर्स नोट्स हिंदी में/ VISION IAS CURRENT AFFAIRS NOTES IN HINDI




VISION IAS के करंट अफेयर्स के नोट्स हिंदी में भी उपलब्ध हैं | ये नोट्स RAS/IAS जैसी परीक्षाओं हेतु सर्वोत्तम है |


VISION IAS CURRENT AFFAIRS जनवरी 2016 DOWNLOAD [10 MB]

VISION IAS CURRENT AFFAIRS फ़रवरी 2016 DOWNLOAD [3 MB]

सोमवार, 23 मई 2016

SUCCESS STORY ज्योति स्वरुप शर्मा- ज्योतिषी से RAS तक का सफ़र

                                                                      
 जीवन परिचय
जन्मतिथि - 31 मई 1978
सेकेंडरी शिक्षा-1994 - राजकीय माध्यमिक विद्यालय राजपुरा बड़ा (अलवर )-71%
सीनियर सेकेंडरी शिक्षा(PCM)-1997 -राजकीय उ.मा.विद्यालय राजगढ़ -68%
B.A.(अंग्रेजी,लोक प्रशासन,दर्शनशास्त्र )-2004-राजस्थान विश्वविद्यालय -62%
B.S.T.C-2001

अलवर की राजगढ़ तहसील के राजपुरा बड़ा गाँव के रहने वाले श्री ज्योति स्वरुप शर्मा एक मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं | ग्रामीण पृष्ठभूमि होने के कारण ये प्रारंभ से ही अपनी पढाई के साथ कृषि सम्बंधित कार्यों में संलग्न रहे | इनकी विद्यालयी शिक्षा गाँव एवं तहसील स्तर पर ही हुई | औसत विद्यार्थी होने की वजह से इन्होने बड़े सपने नहीं देखे बल्कि छोटे-छोटे लक्ष्यों को पूरा करते हुए दूर तक जाने का साहस जुटाया | एक बार पुस्तकों की दूकान पर RAS के पुराने प्रश्न पत्रों को देखने के बाद इनके मन में पहली बार RAS बनने का विचार आया |

श्री शर्मा के संघर्षों का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि RAS बनने से पहले तक इन्होने पैराटीचर, दिल्ली प्राथमिक शिक्षक, थर्ड ग्रेड टीचर और यहाँ तक कि ज्योतिष का कार्य कर अपनी आजीविका चलाई | RAS की तैयारी इन्होने अपने घर से ही प्रारंभ की |दर्शनशास्त्र एवं लोक प्रशासन इनके वैकल्पिक विषय थे |अपने प्रथम प्रयास में असफल रहने के बाद विषय के गहन अध्ययन एवं लेखन के नियमित अभ्यास के दम पर इन्होने RAS 2008 परीक्षा में सफलता प्राप्त की और सहकारी निरीक्षक का पद प्राप्त किया | परन्तु सेवा ज्वाइन करने की बजाये ये बेहतर परिणाम हेतु पुनः प्रयासों में लग गए | अंततः RAS 2010 परीक्षा में राज्य स्तर पर 240वां स्थान प्राप्त किया |

वर्तमान में श्री शर्मा सहायक वाणिज्य कर अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं | राम कहानी के पाठकों को दिए अपने सन्देश में श्री शर्मा ने  बताया कि अभ्यर्थियों को हार से कभी निराश नहीं होना चाहिए अपितु अधिक उत्साह एवं पूर्ण मनोयोग के साथ तैयारी में जुटा रहना चाहिए क्योंकि मंजिल अपने स्थान से कभी नहीं हटती अगर हम गतिमान रहें तो |